दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक आज 3 जून से शुरू हो रही है। यह बैठक 5 जून तक चलेगी, जिसके बाद RBI गवर्नर द्वारा ब्याज दरों और मौद्रिक नीति से जुड़े फैसलों की घोषणा की जाएगी। देशभर के उद्योग जगत, निवेशकों, बैंकिंग सेक्टर और आम लोगों की नजरें इस बैठक पर टिकी हुई हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रेपो रेट में किसी बड़ी कटौती की संभावना कम है। वर्तमान में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बनी हुई है। अप्रैल 2026 की पिछली बैठक में भी RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था और यथास्थिति बनाए रखी थी।
हालांकि, वर्ष 2025 के दौरान RBI ने कुल चार बार रेपो रेट में कटौती की थी। फरवरी 2025 में पहली बार करीब पांच साल बाद दरों को 6.50 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत किया गया था। इसके बाद अप्रैल, जून और दिसंबर में भी कटौती की गई, जिससे रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर पहुंच गई।
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है। जब महंगाई बढ़ती है तो RBI रेपो रेट बढ़ाकर बाजार में नकदी का प्रवाह कम करने की कोशिश करता है। वहीं आर्थिक गतिविधियों को गति देने और लोन को सस्ता बनाने के लिए रेपो रेट में कटौती की जाती है।
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में कुल छह सदस्य होते हैं, जिनमें तीन सदस्य RBI के और तीन केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। यह समिति हर दो महीने में बैठक कर ब्याज दरों और महंगाई से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेती है।
अब सभी की निगाहें 5 जून को होने वाली घोषणा पर हैं, जहां यह साफ होगा कि RBI आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाने के लिए आगे क्या रणनीति अपनाता है।
